Wednesday, July 21, 2010

वो कहानी एक झेन गुरु की…..एक चोर भागता हुआ निकल जाता है। वहां पर एक झेन गुरु ध्‍यान में बैठा हुआ था। पुलिस आकर इस गुरू को ही चोर समझकर पकड़ ले जाती है। और जेल में बंद कर देती है। गुरु कहता है, जैसी उसकी मर्जी वह यह भी नहीं कहता कि मैंने चोरी नहीं की यह सोचता है उसमे आस्‍तित्‍व का कोई राज है। अब जैल में भी गुरु ध्‍यान में लीन रहने लगा। उसके कारण और कैदी भी ध्‍यान करने लगे। 3-4 साल बाद असली चोर पकड़ा गया। पुलिस ने झेन गुरु को छोड़ दिया; कहने लगे, हमें माफ कर दें। गुरु ने कहा, नहीं,अभी मुझे मत छोड़ो। मेरा काम पूरा नहीं हुआ है।
यह कहानी सूना कर ओशो ने कहां हम सभी जेल में है। कोठरी में है। हम एक सी सात बाई सात की कोठरी है। चाहे वह जेल के अंदर हो चाहे बाहर हो। जब तक हम समग्रता से अपना काम नहीं करते तब तक कोठरी से बाहर नहीं हो सकते। .........यह कहानी ओशो times में छाप दी गई थी

Sunday, July 11, 2010

मरण.

जन्माला आले इकडेतिकडे पाहिले
सर्व जग फारच भावले
युगानि कधी मरण आले
ते पाहून फारच कावले.

Monday, February 15, 2010

Home -

प्रिय वाचक,
आज एक मे आज हा ब्लोग प्रकशित करताना फ़ारच आनन्द होत आहे. या ब्लोग मधे मी, वाचक अन्य ब्लोग धारक या मधे एक सुत्रधारकाची कार्ववाही करणार आहे.
प्रथम आभार ह्या ब्लोगची प्रेरणा श्री उन्मेश बगवे................लिन्क आहे http//www.unmeshbagve.com.
I have been blogging since 2006 but had no confidence to start a हिंदी /मराठी blog but it was at this blog of उन्मेष where I was introduced to various tools to start a marathi Blog।
तर उन्मेश अम्ही आपले आभारी आहोत.

Search This Blog